सहिदका सपना – बुनू उप्रेती

Rated 2.65/5 (From 623 user)
bunu uprety   29th Jan 2014   छन्द कविता 0 comments   Like ( 0)   3908 reads  

Bunu Uprety
1 followers | 0 followings | 1 articles
हजारौ तारा झरेर गए
सहिदका सपना मरेर गए
कयौ फुलबारी उजाड भए
तानाशाही देसका मालिक भए
सहिदका सपना अधुरै रहे l
कयौ आमा निसन्तान भए
कयौ श्रीमती बिधुवा भए
कयौ बालक टुहुरा भए
तर सहिदका सपना अधुरै रहे l
सहिद स्वर्गमा बसी नरोहि देउ
अन्याय विरुद्ध लड्ने साहस देउ
दोषीलाइ कानुनको कठघरमा उभ्याउ l
बलात्कारी गुन्डा,चोर फटालाइ फासी मिल्ने
कानुन देसका सभासद मिलि बनाऊ l
बालक महिला र पिडितका चित्कारहरु
सहिदको कानमा नगुञ्जाउ
सहिदको कानमा नगुञ्जाउ ll
बुनू उप्रेती /युएई
COMMENTS
No comments so far!
Other Categories
तिन घुम्ति तिन घुम्ति
Author :बि.पी कोईराला
Paper Back
घामकिरि घामकिरि
Author :Nayanraj Pandey
Publisher : Sangrila Books
Number of page : 299
Price : NRP 350
Paper Back
View more

WRITING NEPAL WEBSITE WAS LAST UPDATED ON— August 29 2020 17:13 |